बाबा के बथान

  • बाबा के बथान
    झारखंडी अप्पन साउस के बिछावन पर सांप देखलक|
    झारखंडी(सांप सs)-हे नाग देवता हमर साउस के डसी लिय |
    सांप- हम एकरा की डसियई एकरे स ता हमरा जहर भेटैया|

    झारखंडी अप्पन कनिया के दिल्ली घुमावs लेला |
    (कुतुबमीनार के सामने )
    झारखंडी- देखही लालकिला यह छै|
    कनिया- हई इ त कुतुबमीनार छै|
    (एक थप्पर मारैत)
    झारखंडी- घुमाव हम लेलुवा की तू ?
    (राति में मकई के रोटी दैत)
    कनिया - लिय पराठा खाऊ |
    झारखंडी - इ त मकई के रोटी छै |
    (एक बेलना मारैत)
    कनिया - खाना हम बनेनु हा की अहाँ ?
  • झुंझुन कक्का आ तिरपित बाबुक क्रिकेट प्रेम
    झुंझुन कक्का आओर तिरपित मिश्र बड घनिष्ठ मित्र छलैथ l दुनु गोटेक उम्र लगभग 90 के आसपास छलैन l तिरपित बाबु बीमार परि गेलाह l तखन झुंझुन कक्का अपना मित्र स सब दिन भेट करय आबय लागलाह l आ बैसी क सब दिन अप्पन मित्रताक खिस्साक गप्प करैत छलैथ l झुंझुन कक्का के विशवास भs गेल छलैन जे हम्मर मित्र आब नहि बचि सकत l एक दिन झुंझुन कक्का अप्पन मित्र सs कहलैथ जे आहाँ जखन मरि जायब तखन हम्मर एकटा काज करब ? ''
    तिरपित बाबु परल-परल कहलखिन कुन काज ?'' ''
    जखन आहाँ मरि जायब त स्वर्ग में जा क पता करब जे ओतय क्रिकेट होइत अछि की नै दुनु गोटे क्रिकेट के बड़ पैघ दीवाना छलैथ '' कियाक नहि जरुर बता देब '' बिछाउन पर परल ओ झुंझुन कक्का के कहलैथ l
    आ एक्के दू-दिन बाद में तिरपित बाबु स्वर्ग पहुचि गेलाह l
    किछु दिनक बाद झुंझुन कक्का के सपना में तिरपित बाबु एलाह आ बजलाह जे तोरा लेल दू टा खबर अछि एकटा नीक आ एकटा अधलाह
    नीक ई जे स्वर्ग में क्रिकेट होइत अछि आ अधलाह ई जे अगिला बृहस्पतीक मैच में आहाँ के बॉलींग करबाक अछि l
  • झारखंडी कक्का-वैष्णव
    सब वृहस्पति दिन हम्मर झारखंडी कक्का माछ-मांस बनबैत छलाह l हुनकर परोसी सब वैष्णव छलखिन्ह l हुनका सब के एही माछ-मांसक गंध सs बड़ दिक्कत होईत छलैन l एकदिन परोसी सब परेशान भs कs अप्पन गुरुदेव सs भेंट कयलनि आs अप्पन सब टा दिक्कत कहि सुनयला l हुनकर गुरुदेव हुनकर सबहक संग झारखंडी कक्का के घर एलाह आ कक्का के कहलखिन्ह l जे अंहु वैष्णव बनि जाऊ l मुदा कक्का के मोंन नाहि मानैत छलैन तखन हुनक परोसी सब सेहो जोड़ देब लगलखिन्ह l
    एकदिन झारखंडी कक्का परोसी सबहक संग गुरुदेवक आश्रम पहुँचलाह l ताहि समय में गुरुदेवक आरती होईत छल l गुरुदेव कक्का के अप्पन लग में बजौलनि आ अप्पन गरदनि स कंठी उतारि झारखंडी कक्काक गरदनि में पहिरा देलखिन्ह आ कहलखिन्ह जे तू जन्म स सांकट छले आ पैघ सेहो सांकटे भेले मुदा आई स तू वैष्णव भ गेले l
    वैष्णव लोकिन बड़ प्रसन्न भ गेलैथ l
    मुदा ....... ई की..........., अगिला वृहस्पति दिन कक्काक घर स फेर माछ-मांसक गंध आबs लागल l
    परोसी सब फेर परेशान भ क अप्पन गुरुदेव के बजा अनलक l
    गुरुदेव कक्का घरक पछोति में गेलाह आ कक्काक क्रिया-कलाप देखि क आश्चर्यचकित रहि गेला l
    हम्मर कक्का थारी में माछ आs रोटी लs कs रखने छलाह आs कहि रहल छलैथ जे तोहर जन्म माछ में भेलहु , पैघ सेहो माछे भेले आ अपना गर्दन स कंठी निकालि क माछ पर राखैत कहला जे आब तो आलू-परोर भ गेले आ ई कहैत रोटी-माछक कौर मुंह में देबय लगलाह
  • तिरहुतनाम
    ओही दिन लालककाक दालान पर गप्प जमि गेल |हुनका ओई ठाम चतुर्थीक हकार पुरै लोक आयल छल | चानन-काजर होइत रहैक |ताही बीच में पहुंची गेला खंडेश्वर बाबा |पंडित जी पान सुपारी बढबैत कहलथिन जे लेल जाओ | ख० बाबा कहलथिन्ह -आहाँ विद्वान छी पहिले अपने लेल जाओ |प० जी कहलथिन -भला ई कोना भ सकैत अछि दिर्घनारायण टिप्पणी कैल्थिंह - एही तिर्हुताम स रेल छुटि जाईत छैक | एतबा सुनैत ख० बाबा अप्पन गप्पक बटुआ खोल्लैथ- तोरा लोकनी केवल सुन्बेटा करै छह,परन्तु हमरा सरिपहूँ गारी छुटल अछि |एकबेर तारसराय में देखल जे हमर पिसिया ससुर रेल पर चढ़ैत छलैथ | रेल सिटी द देने रहैक | हम त गारीक भीतर स हुनक हाथ पकरि खिंच लितियेंह |परन्तु बिना पैर छूने हाथ धरितियें केना? तै प्रणाम करक हेतु निचा उतरय परल | आब ओ बिना आशीर्वाद देने चढीतैथ कोना ओहू में बिना गोरलग्गी क टका देने बिना ? ओ यावत अपना फाँर स बटुआ बहार कै फोलय लगलाह , तावत गारी ससरय लागल |हम कहलियैन - चढ़ी लेल जाओ | ओ बजलाह -- इ कोना भ सकैत अछि ?ओझा पहिने अपने चढ़ल जाओ |तावत गारी निकसि गेल| स्रोतागन बजला -- बाप रे बाप एहन तिरहुतनाम!!!!!!!!
    क्रमशः